सन्तोष का आगमन नित नूतन चितमन।
हर दृश्य अदृश्य चेत मन खुला तन और मन।।
राह डगर की बात हो,हर नगर शहर की बात हो।
सन्तोष का आगमन,हर गली शहर मे ठाठ हो।।
गरीब,अमीर की बात कहे,,सबकुछ द्रश्यमान हो,
ना उंच हो ना नीच हो,हद से अधिक मान हो।।
बही हवा प्यार की-लंठ के ब्यार की।
लंठन की टोली जुटी,मस्त मौला और बहार की।।
सन्तोष का आगमन नित नूतन चितमन
कवि-सन्तोष कुमार यादव*लंठ गुरु*
हर दृश्य अदृश्य चेत मन खुला तन और मन।।
राह डगर की बात हो,हर नगर शहर की बात हो।
सन्तोष का आगमन,हर गली शहर मे ठाठ हो।।
गरीब,अमीर की बात कहे,,सबकुछ द्रश्यमान हो,
ना उंच हो ना नीच हो,हद से अधिक मान हो।।
बही हवा प्यार की-लंठ के ब्यार की।
लंठन की टोली जुटी,मस्त मौला और बहार की।।
सन्तोष का आगमन नित नूतन चितमन
कवि-सन्तोष कुमार यादव*लंठ गुरु*
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